अभिषेक कुमार एवं अभिषेक आनंद

   

युवा विद्यार्थियों के साथ हमने रिठाला का दौरा किया। रिठाला वार्ड नंबर 28 (एन), उत्तरी जोन में स्थित सामान्य सीट है। अगड़ी जाति के बाहुल्य वाले इस इलाके में सबसे अधिक राजपूत वोटरों की तादाद है, कुल जनसंख्या का करीब 45%। इसके अलावा यहाँ ब्राह्मण वोटरों की तादाद 25% है। गौरतलब है कि अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति 15%, अन्य पिछड़ा वर्ग 10% तथा अन्य समुदायों की उपस्थिति 5% है। यह वार्ड अभी भी विकास के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। सफाई तो यहाँ मुद्दा है ही पानी की घोर किल्लत भी एक महत्वपूर्ण समस्या है। पानी की समस्या का समाधान करने में विफल रहे पिछले पंद्रह सालों से यहाँ के विधायक भाजपा के नेता कुलवंत राणा को हार का मुँह देखना पड़ा जबकि सामान्यता यहाँ के लोगों का मानना है कि उन्होंने इस क्षेत्र की खुशहाली हेतु सबसे ज्यादा कार्य किया है। ऐसे में इस सवाल पर और गहराई से सोचने विचारने की ज़रुरत है कि क्या पानी जीत हार का एक मुद्दा बनने लगा है।

 

इस वार्ड की अधिकतर आबादी अभी भी पिछडी हुई जीवनशैली जीने को अभिशप्त है। यहाँ के लोकबाग थोड़ा बहुत काम करके किसी तरह अपना भरण-पोषण कर रहे हैं। इस वार्ड के निरीक्षण के क्रम में यह स्पष्टतः उभर कर सामने आया कि यहाँ के लोग राजीनीतिक रूप से काफी जागरूक हैं तथा अपने अधिकारों के प्रति सर्तक व काफी सज़ग हैं। जैसे कि जब हमने उनसे यह सवाल किया कि लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं, तो बहुधा लोगों का यह मत था कि यह हमारा अधिकार है तथा यह व्यवस्था है जिसके परिणामस्वरूप्‍ हम सामूहिक रूप से निर्णय लेने की व्यवस्था में बराबर के सहभागी हैं। अधिकतर लोगों का यह मत भी था कि “विकास का सवाल तथा उम्मीदवार की निजी पहचान चुनाव जीतने के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण फैक्टर है।” यहाँ एक तरह कुछ लोगों का मानना था कि पार्षद और नगरपालिका अपना कार्य बखूबी करती है। वहीं कुछ लोगों का यह भी मत था कि ये बिल्कुल भी काम नही करती है। इस बात की पुष्ट‌ि हमें भी हुई जब हमने निरीक्षण के दौरान पाया कि नालियाँ में गंदगी काफी थी व जगह-जगह कूड़ें का अंबार लगा हुआ है। बातचीत के दौरान हमने हालिया समय में चर्चित ईवीएम मशीनों के प्रकरण का जिक्र किया तो हमें हैरानी हुई है अधिकांश लोगों ने इस घटना से अवगत थे तथा बहुसंख्य लेगों का मानना था कि ईवीएम में गड़बडी हो ही नहीं सकती है। अधिकांश लोगों का मानना था कि अभी भी चुनाव कराने हेतु यही प्रणाली सबसे बेहतर है तथा इसका कोई विकल्प नहीं है। सबने इस बात पर सहमति प्रदान किया कि इससे पूर्व में होने वाली धाँधली पर रोक लगी है तथा व्यवस्था को सुदृढ़ता प्रदान हुई है 

इस क्षेत्र में एक स्वयंसेवी संगठन कार्यरत है जिसका नाम है रिठाला युवा ब्रिगेड। इस ब्रिगेड ने यहाँ काफी अच्छा काम किया है जैसे नशाखोरी पर रोक लगाना, साफ-सफाई पर ध्यान देना आदि। बातचीत के क्रम में हमें इस संगठन के अध्यक्ष अमित चौहान से बात करने का मौका मिला। उनका मानना है कि राज्य सरकार से अपेक्षित सहयोग ना मिल पाने के कारण अभी काफी कुछ कार्य बाकी रह गये हैं।

आम जनता की चिंता

इस वार्ड में एक पार्क है जिसका नाम है स्वर्ण जयंती पार्क। यहाँ के लोगों ने इस बात पर खासा जोर दिया कि यहाँ अराजक गतिविधियाँ होती रहती है तथा जिसमें अक्सर वाद-विवाद की स्थिति की उत्पन्न होती रहती है। यहाँ इस पार्क के ईद गिर्द काफी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी रहते हैं। इन पर आरोप है कि ये यहाँ अवैध शराब बेचते हैं तथा इनकी वजह से यहाँ का माहौल खराब होता रहता है। कुछ मिलाकर हमें इस बात का अहसास हुआ कि अभी भी यहाँ लोग अपने आप को लाचार महसूस करते हैं तथा उन्हें कुछ समाधान ना हो पोन का मलाल है।

सर्वेक्षण के दौरान हमें यह चौंकाने वाला तथ्य देखने को मिला कि लोगों ने सर्वेक्षण के दौरान हमें इस बातपर अधिकतम जोर दिया कि शीला दीक्षित ने काफी काम किया है तथा केजरीवाल बातें बनाने के अलावा और कोई काम नहीं करते। यहाँ की एक निवासी अनोखी देवी जिनकी उम्र 65 साल है उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि “शीला दीक्षित ने मेरे बेटे को बीमारी से उबारने में मदद की है, भगवान इनका भला करें हाँलाकि यह चुनाव स्थानीय स्तर का है पर यह तथ्य भली भाँति स्पष्ट है कि भाजपा यहाँ पर भी मोदी के चेहरे पर ही वोट माँग रही है। बातचीत के आधार पर यह तथ्य भली-भाँति प्रमाणित हुआ कि राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता के मामले में मोदी जी अभी भी सबकी पहली पसंद बने हुये है तथा विरोधी उनसे मीलों पीछे हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि पड़ोसी प्रदेश उत्तर प्रदेश में जारी एंटी रोमिया अभियान का सारी महिलाओं ने समर्थन किया तथा वे योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली से काफी प्रभावित दिखी। अधिकतर पुरुषों का भी यही मत था। बृज देवी जिनकी उम्र 50 साल है तथा सरोज मिश्रा जिनकी उम्र 36 साल है, दोनों का ही मानना है कि “योगी ने बहुत अच्छा काम किया है तथा इससे समाज का ही भला होगा।” मुरलीधर जो कि दलित समुदाय से आते हैं (उम्र 68 साल) तथा जिनका पेशा किराने की दुकान चलाना है, उनका मत यह था कि मोदी तथा योगी बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं तथा बाकी मुख्यमंत्रियों को योगी से सीख लेने की जरूरत है।

कुल जमा हमारी शोध टीम ने लोगों से विस्तार से बातचीत किया। जैसा कि बातचीत की व्याख्या ऊपर की ही गई है। परंतु उसका लब्बो-लुबाव यह है कि लोकतंत्र के इस पर्व में आम लोकबाग केवल और केवल विकास चाहते हैं तथा एमसीडी चुनाव में भी वह विकास के नाम पर ही वोट दे रहे हैं।

 (दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के मोहम्मद आरिफ, लखन सिंहप्रति शाह, दीप्ती मित्तल का सहयोग सराहनीय है)

  Abheshek Kumar, Independent Researcher, Delhi

 Abhishek Anand, SIS, JNU

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