रितु शर्मा एवं अभिषेक कुमार

 

वार्ड 33 जिसे बेगमपुर के नाम से जाना जाता है नरेला जोन का भाग है तथा यह सामान्य महिला आरक्षित सीट है। यह क्षेत्र मुण्डका विधानसभा के अंतर्गत आता है एवं ग्रामीण जनसंख्या की यहाँ बहुलता है। यहाँ ब्राह्मण तथा यादव वोट सबसे ज्यादा है परंतु, बहुलता यादव वोटरों की है। यह जाति यहाँ सबसे ज्यादा प्रभावशाली है तथा नीति निर्धारण से लेकर हर स्तर तक काफी सक्रिय है। ग्रामीण इलाका होने के कारण इस क्षेत्र में ढ़ेरों समस्याएँ हैं। लोगों से जब हमने बातचीत की तो सबसे प्रमुख समस्या गंदगी के रुप में सामने आई। लोगों का मानना था कि विकास के मामले में इस क्षेत्र से भेदभाव हुआ तथा विकास का पहिया यहाँ घुमते-घुमते आकर रूक गया है। हमने सर्वे के दौरान प्रमुख पार्टियों के प्रतिनिधियों से साक्षात्कार लेने की कोशिश की परन्तु इसमें हम सफल नहीं रहे।

चूँकि यह सीट महिला आरक्षित सामान्य सीट है तो सारी प्रमुख पार्टियों ने जाति विरोध को अपनी तरफ लुभाने की कोशिश की है। यहाँ से कांग्रेस ने अनिता यादव  भाजपा ने जगरोशनी यादव, बसपा ने भावना तोमर व आम आदमी पार्टी ने रीना सिंह को टिकट दिया है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो सभी पार्टियों ने संतुलन साधने की कोशिश की है। यहाँ पूर्व में भाजपा की ही महिला पार्षद थी। कुछ लोगों का मत था कि उन्होंने सिर्फ अपने पहचान वालों का ही विकास किया तथा बाकी क्षेत्र को छोड़ दिया, हालांकि इस बार उनका टिकट काट दिया गया है। लोगों का यह मानना है कि विकास की परिभाषा तब तक ठोस रुप धारण नही कर सकती है जब तक कि जातिवाद की समस्या का अंत ना कर दिया जाए। जातिवाद इस वार्ड की एक प्रमुख समस्या है और लोग वर्ग विरोध के प्रभुत्व से आजिज़ आ चुके हैं। परन्तु बेगमपुर निवासी रामनरेश का विचार आम आदमी पार्टी के प्रति बहुत ही सकारात्मक प्रतीत हुआ. उन्होंने कहा कि 'सफाई का कार्य तो बीजेपी के सिटिंग कौंसलर की होती है, इसमें केजरीवाल कैसे जिम्मेदार है'. केजरीवाल के आने से भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है. अतः बेगमपुर के लोगो से बात चित के दौरान हमें यह अनुभव हुआ की यहाँ किसकी जीत होगी इसका अनुमान लगाना मुश्किल है. 

   

इस क्षेत्र में समस्याएँ बहुत हैं, परंतु कोई भी दयनीय दशा तथा गंदगी इस बार के चुनाव में यहाँ मुद्दा बन चुकी है। लोगों का मानना है कि इस बार वे उसी को यहाँ वोट देगें जो इन दो समस्याओं का भली-भाँति समाधान कर सके। बातचीत के क्रम में हमने पाया कि लोग हर बात में नौकरशाही की धीमी रफ्तार से तंग आ चुके हैं तथा वे इस व्यवस्था को गतिमान तथा पारदर्शी बना देखना चाहते हैं। यहाँ सुरक्षा का मुद्दा उतना प्रभावी नही है क्योंकि लोगों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र होने से यहाँ शहरी आ-बो-हवा का प्रभाव ज्यादा नही पड़ा है। यहाँ की तकरीबन अधिकांश जनसंख्या इस तथ्य से सहमत थी कि योगी आदित्यनाथ द्वारा उठाये गये कदम को दिल्ली में भी लागू कर देना चाहिये। इनका मानना है कि इससे व्यवस्था में सुधार आयेगा।

सर्वे के दौरान हमने इस क्षेत्र में यह जानने की कोशिश की, कि विकास के तथा विश्वास के पैमाने पर कौन खरा उतरता है तो सभी लोगों ने एकमत स्वर में नरेन्द्र मोदी का नाम लिया। यहाँ के लोगों का मत था कि केजरीवाल ने व्यवस्था का तमाशा बना कर रख दिया है तथा सिवाय आरोप लगाने के वे कुछ नहीं करते। हमें इस क्षेत्र में उनके प्रति एक अजीब सा नैराश्य भाव मिला। कुछ बुजुर्गों ने बातचीत के दौरान इस तथ्य पर जोर दिया कि कांग्रेस ने कुछ तो विकास किया। केजरीवाल ने तो यह विकास का पहिया ही तोड़ दिया। सर्वे से एक तथ्य मजबूती से उभर कर सामने आया कि यहाँ मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा भाजपा के ही बीच है।

सबसे चौंकाने वाली या कहा जाये की मजेदार बात यहाँ प्रत्याशियों के चुनाव प्रचार करने का तरीका था। जो प्रत्याशी यहाँ से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं उन्होंने तो चुनाव आयोग द्वारा दिये गये चिन्ह का ही प्रतीक बोलना शुरू कर दिया है। जैसे कि अगर किसी को बाँसुरी चिन्ह मिला है तो वह बाँसुरी बाँट रहा है तो चश्मा चिन्ह पाने वाला चश्मा। कुछ प्रत्याशियों ने तो अपने वजन के बराबर तौलवा कर लड्डू भी बाँटे हैं।

मुण्डका विधानसभा का यह क्षेत्र अभी भी विकास की बाँट जोह रहा है। राजनीति के परंपरागत प्रतिमानों से त्रस्त व बदहाल जनता यहाँ अब विकास की राजनीति चाहती है।

इस वार्ड की दशा और दिशा जानने के बाद हमने वार्ड 35 का रूख किया। यह वार्ड भी मुण्डका विधानसभा क्षेत्र के अंर्तगत ही आता है। यह क्षेत्र अपने आप में ग्रामीण परिवेश को समेटे हुये है। ग्रामीण जीवन की मधुरता तथा जीवंतता यहाँ अभी भी बनी हुई है। इस क्षेत्र के प्रतिमान को जब हमने यहाँ के संदर्भ में समझने की कोशिश की तो यह तथ्य स्पष्टतः सिद्ध हुआ कि इसको लेकर लोगों के अलग-अलग मत हैं तथा वे अपनी सामान्य समझ के आधार पर ही इसकी परिभाषा अभी भी करते हैं। कुछ लोगों ने लोकतंत्र को जहाँ सहभागिता का मंत्र माना वहीं कुछ लोगों का मत था कि लोकतंत्र में वोट देने के अधिकार मिलने से इस व्यवस्था से सीधे तौर पर जुड़ाव महसूस करते हैं।

हर क्षेत्र की भाँति यह क्षेत्र भी समस्याओं से ग्रस्त है तथा अछूता नहीं है। गंदगी के साथ-साथ क्षतिग्रस्त सड़क यहाँ की प्रमुख समस्या बनी हुई है। यहाँ के लोग पुराने निगम पार्षद से संतुष्ट नहीं हैं तथा वे बदलाव चाहते हैं। अधिकतर लोगों का मानना था कि वे बदलाव चाहते हैं, एक ऐसा बदलाव जिसके तहत वे समस्याओं का समाधान कर सकें।

यह क्षेत्र जाट बहुल है तथा यहाँ पर इनका ही सामाजिक, राजनीतिक तथा आर्थिक प्रभुत्व रहा है। अधिकतर पार्षद इस वर्ग से ही यहाँ रहे हैं। ग्रामीण बहुल क्षेत्र होने से यहाँ अभी भी सामंतवादी मानसिकता बरकरार है। हाँलाकि चौंकाने वाला तथ्य कुल मिलाकर देखा जाये तो दोनों वार्डों के सर्वेक्षण में एक समान तथ्य यह रहा कि लोग समस्याओं का समाधान चाहते हैं, वे समस्यायें जो कि उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं। दूसरी बात यह प्रतीत हुई कि वे भेदभाव रहित विकास चाहते हैं एवं विकास आधारित राजनीति के प्रति उनमें अगाध आस्था है।

(कालिंदी कालेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीती विज्ञानं विभाग की छात्राएं निशा वर्मा, संध्या, सोनाली, श्वेता का अप्रतिम योगदान इस लेख में सराहनीय है.)

 

 Ritu Sharma, Assistant Professor, Department of Political Science, Kalindi College, University of Delhi

 Abheshek Kumar, Independent Researcher, Delhi.

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