संजीव कुमार  एवं रौशन कुमार शर्मा 

IESAI के मुख्य सदस्य संजीव कुमार उत्तर प्रदेश की राजनीतिक गहमा-गहमी और युवाओं में इसके प्रति जागरूकता पर कुछ गोरखपुर अभियंत्रिकि (Engineering) विदश्वविद्यलय के युवाओं (रितांशु, सिद्यार्थ और सौरभ) से बातचीत किया।

संजीव : मेरा नाम संजीव कुमार है और मैं दिल्ली विश्वविद्यालय में पीएचडी का छात्र हूँ। क्या मैं आपलोगों का नाम जान सकता हूँ?

सभी  : रितांशु जैन, सिद्यार्थ सिंह और सौरभ।

संजीव : राजनीति से आपलोग क्या समझते है और किस तरह की दिलचस्पी आपलोग राजनीति में रखते है?

रितांशु : मुझे Personally कोई interest नहीं आता। जितना मुझे paper से headline मिल जाता है उतना ही पढ़ लेता हूँ।

संजीव : क्या मिल जाता है उसमें पढ़ने को आपकोक्या समझ आता है?

रितांशु :  सर समझने वाली बात नहीं है। बस है कि election कब हैकौन चुनाव में खड़ा हुआकौन select हुआ। बस। जितना जिस समय आया बस उतना। Interest नहीं है Politics में इतना।

सं. कु.:   ये कभी सोचते हैं कि आखिर जो भी News आप पढ़ते होंगे,  Popular News  होता है। जिस तरीके से News बन रहे हैंतो क्या मन में विचार आता हैक्यों Interest नहीं आता है? समाचार से किस तरह का प्रभाव पडता है आपके वोटिंग बिहेवियर पर।

 

सौरभ :   बात यह है कि U.P. का जो Voting sense है, न लोग क्या सोचेंगे..... Mind make-up हैंक्या सोचकर Voting करते हैं........वो मतलब कि बहुत ज्यादा एक.... आप भी जानते हैं कि क्या चल रहा है। क्योंकिस base पर लोग किसको वोट करते हैं। लेकिन अब हम चाहते हैं कि वो चीज न हो। वह हम जो सोच रहे हैंहमें लग रहा है ऐसा सोचने वाले कम लोग हैं कि हमें यह देखना चाहिए कि हमारे parents क्या कर रहे हैंवो हम ध्यान न दें कि वे किस base पर वोट कर रहे हैं। हमें अपना view रखना चाहिए कि क्यों वोट दे रहे हैं।  बिल्कुल as a development, as a personal आपको कितना फायदा करेगा वा। अब सोसायटी को कितना फायदा दे रहे हैं - ये चीज बहुत कम लोग देखते हैं।

सं. कु. :  आप लोगों में से किसी ने वोट किया है अभी तक... ?

सभी  :   नहीं किया है ...

सं. कु. :  अगर मान लो वोट करना हो - मतलब वोट का age हो गया है न.... तो इस बार वोट करना है

रितांशु :   नहीं मेरा नहीं है वोट कार्ड - वोटर आई.डी. नहीं बना है।

सौरभ  :   हन कर्ना है

सं. कु. :  आपको करना है। ठीक है अगर कार्ड बने तो, उसके बाद आप किस आधार पर वोट करना चाहेंगे?

सौरभ  :  यह situation पर depend करता है कि...

सं. कु. :  किस आधार पर आप decide करेंगे कि whom to vote?

सौरभ :  सरजैसा कि अभी दिख रहा है Political agenda जातिवादी है सारी पार्टियों का। तो यह इस basis पर न हो. इससे हटकर हो। पूरे सोसायटी को फायदा करे। ऐसा न हो कि किसी particular को फायदा हो। Predominant जितनी भी पार्टिज है सरवो जातिवादी पर टिकी हैं। BSP और एक SP दोनों जातिवाद पर ही है। उन दोनें में बात यह है कि दोनों जातिवाद पर है... अब मैं किसको वोट करूँएक ही चीज हैतो मन नहीं करता सर किसी को वोट करने का।

सं. कु. :  क्या लगता है कि क्या चीजें बदलनी चाहिए जिससे कि आपको वोट करने का मन हो! कोई ऐसा नया पार्टी आये। या फिर पार्टियों में कुछ change हों।

सिद्यार्थ: जो भी Politician हैं हमारेजैसे हम engineer बनते हैं तो आपकी भि minimum requirement होती है। Politics में क्या है कि आप जित्ना भि पदे, फिर भि दर्जा स्बका same है। Totally experience पर है उस field में कितने दिन तक रहे हैं। Even आपका कोई अगर criminal record भी रहा होतब भी आप चुनाव में खड़े हो सकते हैंजीत सकते हैं। नेता बन सकते हैं। और अगर criminal case हो भी बताओतब भी आप rule कर सकते है। सर ये सही नहीं लगता है। जैसे जो जिस आधार पर उसकी qualification हैउस आधार पर उसको post दीजिए। जैसे अभी स्मृति ईरानी को दे दी गयी थी किसी की सारी गड़बड़कर दीउसके लायक थी नहीं वो।

सं. कु. : तो पार्टियाँ मतलब सभी जो हैंजैसे अभी BJP का dominance है यहाँ... ठीक से यहाँ BJP से सांसद रहते हैंतो उनका Agenda, BSP और सपा का.. इन तीनों में क्या difference आपको मिलता है?

सिद्यार्थ: सारे अपनी-अपनी community को ध्यान देते हैं। ये अगर BJP है तो अपने sector को (पंडित होक्षत्रिय हो) ज्यादा ध्यान देती है। और वो SP अपना देखती है, BSP अपना देखती है। थोड़े बहुत ध्यान देंगे वोउनका concentration इसी सेक्टर को रहेगा। इनका थोड़ा अपने पर ज्यादा रहेगादूसरे का ख्याल जब बाद में आएगा, First priority अपना है। वो उस तरीके से नहीं देखते। Development के base पर नहीं देखते हैं। और एक बार जब ruling में आते हैं... election जब आने वाला होता हैउसी समय में development चालू होता है। जैसे - इलाहाबाद में साल भर पहले ही development काफी चालू हुआ है। जैसे - एक पार्क बन गया। पार्क बनने के बाद कोड बन गयी। सीवर लाइन का जो काम बहुत सालों से चल रहा था... उसमें थोड़ी स्पीड आ गयी है। सरजब election एकदम पास आ जाता है तब ये लोग active होत हैं। बस वोट बैंक की बात है न। जैसे - सपा का थोड़ा मुस्लिमों के प्रति deviation है। ओवैसी के प्रति थोड़ा उनका वो था ... थोड़ा उन्हें स्पोर्ट किया था Indirectly ताकि मुस्लिम वाला वोट बैंक भी मिल जाए। जो कि BSP को नहीं मिलेगा...

सं. कु. : अच्छा मान लो कि Hypothetical situation जैसे इंजीनियर्स को बनना हो political party का मेम्बर ठीक है उनको अगर govern करना हो सोसायटीतो कैसे करेंगेक्या-क्या सुधारेंगेमान लो आपकी पार्टी बन गयी...

रितांशु जैसे हमारी पार्टी बनी तो हम ये देखेंगे न कि एक सोसायटी की basic needs क्या हैकमियाँ क्या हैहम एकदम ऐसा नहीं सोचेंगे कि एकदम हाई-फाई बना दें। पहले मतलब कि नीचे दर्जे से शुरू करेंगे कि basic need ... एड layer by layer ... पहले सबसे पहले एक basic layer तैयार करना ... तो basic layer हमने improve की... अच्छा ये हो गया ... इसके बाद थोड़ा और ऊपर की।

सं. कु. : जैसे कि अभी आपने जो बताया कि एक साल के अंदर जब चुनाव होने वाला होता है तब पार्क बना देते हैं या ब्रिज बना देते हैं तो वो तरीका जो है उससे ज्यादा फायदा नहीं हो रहा है?

रितांशु  : क्यों फायदा होगा ... फायदा हो ही नहीं सकता है ... बस लोगों को दिखाने के लिए कर रहे हैं। रिश्तेदारी बाये हो रही है आजकल। ऐसा surety नहीं है वो हार जाएंगे और उनका memorandum जो निकलता हैवो complete उसी डर से करते हैं। अगर उनको मालूम रहे कि उनकी पार्टी अगर आती है तो वे भी न करे वे।

सं. कु.  : मतलब कि अगर राशन बढ़ा दिये तो उससे कोई फायदा नहीं होगा ... लेकिन ब्रिज बना दिया तो लोगों को वो दिखेगा। तो मतलब development का जो मॉडल है अभी - जिस पर काम कर रही हैं पार्टियाँ या सरकार कर रही है वो basically एक political agenda है। उससे लोगों का फायदा नहीं होता है।

सौरभ   : नहींऐसा नहीं कह सकते कि होना नहीं है। मतलब कि जिस way में कर रहे हैं वो ... सरजब उसकी need थी तब तो उन्होंने नहीं बनाया ... अब जब उनको need है वोट की तब उन्होंने बनाया। फायदा तो हो रहा है सर लेकिन जब जरूरत है तब हो रहा है। और ऐसा भी है जब development मैं देखता हूँ कि development सिर्फ लखनऊ में हो रहा है। ऐसा हो जा रहा है कि सिर्फ लखनऊ दिल्ली के बराबर पहुँच जा रहा हैबाकि सब वैसे ही पड़ा हुआ है। बाकि सारे शहर वैसे ही हैं। काफी सारे शहर वैसे ही हैं। अब गोरखपुर देखिए सर ... एक साल में इत्ता सा (इशारा) भी चेंज नहीं आया। C.M. आकर चले गयें। राज्यपाल आकर चले गयें।

सं. कु. : तो M.P., M.L.A. क्या करते हैं... वो भी कुछ नहीं करते...

सौरभ  : सर कोई active नहीं हैलिखता नहीं हैकाम दिखता नहीं है। काम बोलता है - काम बोलता है’ तो हो रहा है ... गोरखपुर के लिए कुछ दिखता नहीं है जी हांखाली लखनऊ को देखकर आपको जज करना तो आप कहेंगे - बहुत काम हुआ हैबहुत development हुआ है। आपने भी देखा ही होगा। कितना grow किया है पिछले 10 सालों में लखनऊ एकदम ग्राफ

सं. कु. : लखनऊ में आप कहाँ से हैं?

सौरभ  : मैं जानकीपुरा साईड से। गोमतीनगर से।

सं. कु. : अभी नोटबंदी से कुछ हुआकुछ फर्क पड़ा है इधरआप लोगों के लाईफ में कुछ ...

रितांशुहाँ पड़ा है पर। जहाँ तक मेरा perception है मैं उतना सिस्टम में झाँककर देखता नहीं हूँ तो मुझे नोटबंदी से कुछमुझे फर्क ही नहीं पता चला। मुझे बस ये पता लगा कि कुछ दिन मेरे पैसे नहीं निकले। बस यही है सर। अगर मुझे कुछ खाने का मन कर रहा है तो मैं खा नहीं पाया हूँ।

सं. कु.  : चलिए, Technical Environment से आते हैं आप लोग तो क्या लगता है - नोटबंदी एक सही विचार था या नहीं?

रितांशु  : शॉर्ट टर्म चीज है ये नोटबंदी। कुछ दिन तक आपको थोड़ा तकलीफ होगी। जितने समय से हुआ है demonstration, उतने समय से लोगों को नोट चेंज करवाने में ये जो दिक्कत हुईलोगों का जितना था उनको टेंशन थी - यार मेरा कैसे चेंज होगा! लास्टलोगों का ब्लैक मनी पकड़ा गया। अब लेकिन एक नयी शुरूआत है। यहाँ से तो शुरूआत हो जाएगी नयी। ये खत्म नहीं हुई है चीज। ये स्टॉक बनाये हुए थेये आपका खराब कर दिया। लेकिन हमने आगे आपको नहीं रोका है। आप फिर से कर सकते हैं।

सं. कु. : मतलब ब्लैक मनी जो produce होगा उसी मतलब pace से होगा।

रितांशु : उसको नहीं रोका है। बस हमने यही कहा है कि आज ये खत्म करोखत्म करो तो लग रहा है कि खत्म कर दिया। वो लोग नये सिर से चालू कर दिए हैं।

सं. कु. : कुछ ऐसा होता है न किसी जैसा एक कहानी है - एक कुँआ हैउसका जो source है पानी का वह जहरीला हैतो ठीक है demonstration ने क्या कियाजितने पानी उसमें पड़े थे उसको निकालकर फेंक दिया जितने पानी उसमें पड़े थे उसको निकालकर फेंक दियालेकिन source को clear नहीं किया है। वो पानी जो फिर से आएगावो जहरीला ही आएगा।

सिद्यार्थ: Step अच्छा लियासोची अच्छी thinking थी - लेकिन उन्होंने इसको future में नहीं। बोलते हैं सर न prevention is better than cure. हम लोगअभी cure कर रहे हैं prevent नहीं कर रहे हैं। हम लोग साफ कर रहे हैं उसको। लेकिन उसका prevention नहीं कर रहे हैं। उसका जो main source है उसको नहीं बंद कर रहे हैं।

सं. कु. अच्छा एक आखिरी सवाल कि लोकतंत्र है जो democracy है। democracy का मतलब क्या है आप लोगों के लिए?

सौरभ  : उस चीज को अच्छे से समझते भी नहीं हैं।

सं. कु. : लेकिन क्या समझ है अभी तक की।

सौरभ : तो Democracy तो हमारी कहती है Right to Equality, Right to Freedom. हम कुछ भी कर सकते हैं। Media भी open हैलेकिन मीडिया को भी कई बार ... कुछ पार्टी को support कर देती है। जबकि यह नहीं होना चाहिए। मीडिया तो free होनी चाहिए। किसी को भी मतलब ... कुछ हद तक मीडिया ... बीजेपी की ओर दिखाती रहती है - ये सब नहीं होना चाहिए। डेमोक्रेसी का full use नहीं होना चाहिए। बात यह है कि उनकी भी गलती नहीं है। नया चैनल खोला था उसको भी बिजनेस बना दिया। तब उन्हें अब चलाना है तो उसका इस समय चल रहा हैएक समय रूतबा है। उसे मानना ही पड़ेगा। डेमोक्रेसी का मतलब है सर other people, by the people, for the people. ये हम लोग ही बजाते हैंचलाते हैं और हम ही लोग चलायेंगे भी। लेकिन चला हम लोग नहीं रहे हैं। सर हम लोग का विश्वास जीत के जो काम हम लोग से कहा जा रहा है किया जाएगालेकिन वो किया नहीं जा रहा है। लेकिन जैसा हम चाहते थे काम वो हो नहीं रहा है। हो उसी के हिसाब से रहा है जो रूल कर रह रहा है। वो सिर्फ हमें दिख तो रहा है ऐसा चल रहा है लेकिन वैसा चल नहीं रहा है।

सं. कु.  : मतलब जो काम हो रहा है उसमें participation आपका होना जरूरी है या output important है?

सिद्यार्थ: Media तो output ही है। ये काम हम भी कर सकते थे जो हमारे नेता कर रहे हैंलेकिन हम उस पद पर नहीं है न कि हम वहाँ जाकर करें। काम तो उसका करवाना है। हमारा काम आउटपुट लेना है। हमने उसे चुना इसलिए है न। कुछ हद तक हमारा participation बनता है।

सं. कु. :  मान लो अगर आउटपुट नहीं आ रहा है तो फिर आप किस तरह से participation को reform करना चाहेंगे।

रितांशु  : आपने वोट किया वो काम नहीं किया 5 साल तक। तो इस 5 साल के बीच में ऐसा कुछ सोचते हैं इस बीच में ऐसा कुछ सोचते हैं इस बीच में हमारा participation हो।

सं. कु. : तब वो ensure करेगा हमारा काम कि output आ जाएगा?

रितांशु : हम ये सोचते हैं न कि हमने उसे बना दिया अब हमारा काम खत्म। अब जो करना है उसे ही करना है। हमने हम क्लास में थे - हमने एक मॉनिटर चुन लिया - हमारा काम था चुन लिया। अब तुम शांत बताओ क्लास। हमारी जिम्मेदारी नहीं है कि हम चुप रहेतुम्हारी जिम्मेदारी है कि तुम पूरी क्लास शांत कराओ।

सं. कु.:  इस situation में क्या चाहेंगे आप?

रितांशु :  जो situation इस समय चल रही है यह हमने कर दियावो शांत करा भी नहीं रहा है। लेकिन हम अपना वाला factor नहीं देख रहे हैं। हम खाली उसी को blame कर रहे हैं कि तुम शांत नहीं करा रहे हो। ये नहीं कह रहे हैं कि मैं चुप रहूँ।

सं. कु. : मतलब पब्लिक को एक्टिव होने की जरूरत है।

रितांशु :निःसंदेह आम नागरिक को एक्टिव व जागरूक होने की जरूरत है।

सं. कु.: आप सभी लोगों का धन्यवाद। 

सभी :  जी आपका भी धन्यवाद।

 

 संजीव कुमार, सहायक प्राध्यापक, श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय।

 रौशन कुमार शर्मा, शोधार्थी, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय।

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